गारंटी देने वाला नेतृत्व: मोदी ने कैसे बदली घोषणाओं की राजनीति

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जनसेवा में 25 वर्ष: जनकल्याण, सुशासन, विकास और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित एक सतत यात्रा।
भारतीय राजनीति में दशकों तक बड़े-बड़े वादों और आकर्षक नारों का बोलबाला रहा। ‘गरीबी हटाओ’ जैसे नारे गूँजते रहे, योजनाएँ बनती रहीं, लेकिन घोषणाओं और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच की दूरी बनी रही। जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यह था कि सरकार के वादे कब पूरे होंगे और उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक कब पहुँचेगा।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसी परंपरागत राजनीति को चुनौती देते हुए घोषणाओं से क्रियान्वयन और वादों से परिणाम की राजनीति पर बल दिया। यही उनके नेतृत्व में ‘मोदी की गारंटी’ की अवधारणा का आधार बना।
नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में घोषणाओं को केवल चुनावी वादों तक सीमित न रखकर उन्हें जवाबदेही, समयबद्ध क्रियान्वयन और ठोस परिणामों से जोड़ा। यही कार्यशैली आगे चलकर ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में स्थापित हुई।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने ज्योतिग्राम योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की समस्या का समाधान करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की। कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग फीडर की व्यवस्था विकसित कर गाँवों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
गाँव-गाँव बिजली पहुँचाने का संकल्प लेकर लगभग 1,000 दिनों में ज्योतिग्राम योजना को व्यापक रूप से लागू किया गया। यह केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि संकल्प को सिद्धि में बदलने का उदाहरण बना।
गरीब कल्याण मेले: गरीब एवं वंचित परिवारों तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचाने के लिए ‘गरीब कल्याण मेलों’ का आयोजन किया गया। इसके माध्यम से बिचौलियों की भूमिका कम कर जरूरतमंदों को सरकारी सहायता और स्वरोजगार के साधन उपलब्ध कराए गए। यह पहल घोषणाओं को धरातल पर उतारने और प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने का सशक्त प्रयास थी।
कृषि महोत्सव: किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, मिट्टी परीक्षण और उन्नत खेती से जोड़ने के लिए ‘कृषि महोत्सव’ की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत आयोजित पशु स्वास्थ्य मेलों में सामान्य उपचार के साथ मोतियाबिंद के ऑपरेशन, दंत चिकित्सा और अन्य शल्य चिकित्सा की सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। इस पहल ने खेती के साथ पशुधन संरक्षण और किसानों की समग्र समृद्धि को प्राथमिकता दी।
कन्या केलवणी महोत्सव एवं शाला प्रवेशोत्सव: बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन देने, विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और पढ़ाई छोड़ने की प्रवृत्ति कम करने के लिए इन अभियानों की शुरुआत की गई। सरकारी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और समाज की भागीदारी से शिक्षा को केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व बनाने का प्रयास किया गया।
स्वागत (SWAGAT) कार्यक्रम: अप्रैल 2003 में शुरू किए गए इस तकनीक आधारित शिकायत निवारण कार्यक्रम ने आम नागरिकों को अपनी शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री तक पहुँचाने का अवसर दिया। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को बल मिला। वर्ष 2010 में इस पहल को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित पब्लिक सर्विस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
जनभागीदारी, तकनीक, प्रभावी प्रशासन और निरंतर निगरानी के माध्यम से जनकल्याण को वास्तविक परिणामों से जोड़ने का प्रयास किया गया। यही कार्यशैली आगे चलकर ‘मोदी की गारंटी’ की पहचान बनी, जहाँ वादे केवल घोषणाएँ नहीं, बल्कि समयबद्ध क्रियान्वयन, जवाबदेही और परिणाम देने की प्रतिबद्धता बने।
मोदी की गारंटी : संकल्प से सिद्धि तक
गुजरात में विकास और सुशासन की नई कार्यसंस्कृति स्थापित करने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रीय स्तर पर भी संकल्पों को परिणामों में बदलने की परंपरा को आगे बढ़ाया। देश के लगभग 18,000 बिजलीविहीन गाँवों तक 1,000 दिनों में बिजली पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया और उसे पूरा करने की दिशा में निर्णायक कार्य किया।
15 अगस्त 2014 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी जी ने स्वच्छता और वित्तीय समावेशन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत करोड़ों शौचालयों का निर्माण हुआ और वर्ष 2019 तक ग्रामीण स्वच्छता कवरेज को आधिकारिक रूप से 100 प्रतिशत घोषित किया गया। वहीं, प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा। आधार, मोबाइल और यूपीआई के विस्तार ने डिजिटल लेन-देन तथा सरकारी सेवाओं की पहुँच को नई दिशा दी। राष्ट्रीय एकता के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 से जुड़े विशेष प्रावधानों को निष्प्रभावी किया गया। इसी प्रकार वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध सुरक्षा, विकास और प्रशासनिक पहुँच को मजबूत करते हुए 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
इन पहलों में मोदी जी की कार्यशैली का एक स्पष्ट सूत्र दिखाई देता है-समस्या की पहचान, लक्ष्य का निर्धारण, समयसीमा तय करना, प्रभावी क्रियान्वयन और परिणामों के प्रति जवाबदेही।
गुजरात में बिजली, गरीब कल्याण, कृषि, शिक्षा और सुशासन से प्रारंभ हुई यह यात्रा राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता, वित्तीय समावेशन, डिजिटल सशक्तिकरण, राष्ट्रीय एकता और आंतरिक सुरक्षा तक पहुँची।
मोदी जी की राजनीतिक कार्यशैली का मूल आधार केवल घोषणाएँ करना नहीं, बल्कि संकल्पों को सिद्धि तक पहुँचाना रहा है। इस दृष्टिकोण ने शासन में लक्ष्य, समयसीमा, क्रियान्वयन और जवाबदेही को विशेष महत्व दिया।
यही ‘मोदी की गारंटी’ का सार है, केवल वादा नहीं, बल्कि वादे को परिणाम में बदलने की प्रतिबद्धता।

- परेश गोहेल Osd टु अध्यक्ष, इफको नई दिल्ली।