संस्कृति मानव सेवा संस्थान द्वारा दिव्यांगजनों के लिए आयोजित ‘दिव्य रात्रि रास गरबा’ बना उत्साह, उमंग और सामाजिक समरसता का प्रतीक

संस्कृति मानव सेवा संस्थान द्वारा दिव्यांगजनों के लिए आयोजित ‘दिव्य रात्रि रास गरबा’ बना उत्साह, उमंग और सामाजिक समरसता का प्रतीक

संस्कृति मानव सेवा संस्थान द्वारा 13 अक्टूबर 2026 की रात्रि को दिव्यांगजनों के लिए ‘दिव्य रात्रि रास गरबा’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल गरबा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रेम, सम्मान, सहयोग, समानता और मानवीय संवेदनाओं का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया। दिव्यांग भाई-बहनों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ गरबा में भाग लिया। उनके चेहरों पर खुशी, आत्मविश्वास और आनंद की झलक ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

इस विशेष आयोजन को सफल बनाने में पारसमणि सोसाइटी के कनू भाई, राजा भाई, प्रियांश तथा उनकी पूरी टीम का सराहनीय योगदान रहा। सोसाइटी के सदस्यों ने दिव्यांगजनों को अपने कैंपस में गरबा करने का अवसर प्रदान करके सामाजिक समावेश और संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की। केवल आयोजन की अनुमति ही नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया। चलने, उठने-बैठने में कठिनाई का सामना करने वाले प्रतिभागियों को सोसाइटी के सदस्यों और युवाओं ने आवश्यक सहयोग दिया। उनकी सेवा भावना, आत्मीयता और अपनत्व ने सभी दिव्यांगजनों को यह एहसास कराया कि वे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं।

भोजन व्यवस्था में रोटरी सुप्रीम का सराहनीय सहयोग

इस आयोजन में दिव्यांगजनों के लिए भोजन की व्यवस्था रोटरी सुप्रीम की ओर से की गई। इस सेवा कार्य के लिए दिलीप भाई, तेज सिंह जी, विवेक जी तथा रोटरी सुप्रीम की पूरी टीम के प्रति संस्कृति मानव सेवा संस्थान ने हृदय से आभार व्यक्त किया। टीम ने भोजन की उत्तम व्यवस्था करके लगभग 350 लाभार्थियों को भोजन प्रदान किया। इस सहयोग ने कार्यक्रम की खुशियों को और बढ़ा दिया तथा सेवा और सहभागिता की भावना को सशक्त किया।

संस्था की ओर से पारस मणि सोसाइटी और रोटरी सुप्रीम की सभी टीमों के प्रति विशेष धन्यवाद व्यक्त किया गया। इस प्रकार का सहयोग यह दर्शाता है कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एक सकारात्मक उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं, तो दिव्यांगजनों के जीवन में खुशियों, आत्मविश्वास और सम्मान के नए अवसर पैदा होते हैं।

14 वर्षों से दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित संस्था

संस्कृति मानव सेवा संस्थान वर्ष 2013 से दिव्यांगजनों एवं समाज के जरूरतमंद वर्गों के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, भोजन, कौशल प्रशिक्षण, रोजगारोन्मुख गतिविधियों तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएँ प्रदान कर रही है। संस्था का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के समान अवसर प्रदान करना भी है।

‘दिव्य रात्रि रास गरबा’ संस्था की इन्हीं संवेदनशील और समावेशी गतिविधियों की एक नई कड़ी है। गरबा जैसे सांस्कृतिक उत्सव के माध्यम से दिव्यांगजनों को अपनी प्रतिभा व्यक्त करने, आपसी मेलजोल बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों के उत्साह ने यह संदेश दिया कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की खुशियों, इच्छाशक्ति और जीवन के उत्सव में बाधा नहीं बननी चाहिए। उचित अवसर, सहयोग और सम्मान मिलने पर हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकता है।

यह आयोजन समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश छोड़ गया कि सच्ची सेवा केवल सुविधाएँ देने में नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, अपनत्व और समान भागीदारी का अवसर देने में है। पारसमणि सोसाइटी और रोटरी सुप्रीम के सहयोग से आयोजित यह गरबा उत्सव सामाजिक एकता, मानवीय संवेदना और दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का एक सुंदर उदाहरण बन गया।

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